• सच ज़िंदा है

    रितुपर्णा सेनगुप्ता द्वारा अनुवादित

    गौहर रज़ा

    November 23, 2019

    सच ज़िंदा है

    जब सब ये कहें ख़ामोश रहो
    जब सब ये कहें कुछ भी ना कहो
    जब सब ये कहें, है वक़्त बुरा
    जब सब ये कहें,
    ये वक़्त नहीं, बेकार की बातें करने का

    जब सब ये कहें कुछ समझो तो
    जब सब ये कहें कुछ सोचो तो
    जब सब ये कहें
    कलियों का चटकना क्या कम है
    फूलों का महेकना क्या कम है
    शाख़ों का लचकना क्या कम है
    बिंदिया का चमकना क्या कम है
    ज़ुल्फ़ों का बिखरना क्या कम है
    प्यालों का छलकना क्या कम है

    जब इतना सब है, कहने को
    जब इतना सब है लिखने को
    क्या ज़िद है के ऐसी बात करो
    जिस बात में ख़तरा जान का हो

    जब सब ये कहें, ख़ामोश रहो
    जब सब ये कहें, कुछ भी ना कहो
    तब समझो , पतझड़ रुत आई
    तब समझो मौसम दार का है
    तब सहमी, सहमी रूहों को
    ये बात बताना लज़िम है
    आवाज़ उठ्ठना लज़िम है
    हर क़र्ज़ चुकाना लज़िम है

    जब सब ये कहें, ख़ामोश रहो
    जब सब ये कहें, कुछ भी ना कहो
    तब समझो कहना लज़िम है
    मैं ज़िंदा हूँ, सच ज़िंदा है,
    अल्फ़ाज़ अभी तक ज़िंदा हैं

     

     

    Truth Survives

    When the world commands your silence
    When the world demands your muteness
    When the world insists, the times are bad
    When the world objects—
    this isn’t the time, to speak of things futile

    When they urge you to be sensible
    When they urge you to be reasonable
    When they urge you to consider that:
    the blooming buds are no less
    the fragrant flowers are no less
    the swaying boughs are no less
    the sparkling bindis are no less
    the tumbling tresses are no less
    the spilling goblets are no less;

    When so much awaits to be expressed
    When there is so much to write about—
    Why then persist with speaking of that
    which poses a threat to life?

    When the world commands your silence
    When the world demands your muteness—
    Then know, that fall has arrived.
    Then know the season of gallows is here.
    Then for shrinking, cowering spirits,
    Sharing this truth is urgent
    Raising one’s voice is urgent
    Paying each debt is urgent.

    When the world commands your silence
    When the world demands your muteness
    Then know it is vital to say:
    I am alive, Truth survives,
    and words still endure
    .


    Gauhar Raza is a noted poet, activist, scientist, and documentary filmmaker based in Delhi.
    Rituparna Sengupta is writing her doctoral dissertation in culture studies at IIT Delhi.

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