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in Features, Speaking Up

मोदी के नाम संजीव भट्ट का खुला ख़त

byन्यूज़क्लिक रिपोर्ट
June 22, 2019
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पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 20 जून को जामनगर की अदालत ने आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी है। ये सज़ा 1990 में हिरासत में हुई एक मौत के मामले में सुनाई गई है। उस वक़्त संजीव भट्ट जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। इसके अलावा संजीव भट्ट का सत्ता से सवाल करने का अपना इतिहास रहा है। संजीव भट्ट ने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 2002 गुजरात दंगों को ले कर आरोप लगाए हैं। इसी कड़ी में 2012 में जब आरोपी बाबू बजरंगी, डॉ माया कोडनानी को सज़ा सुनाई गयी थी, तब संजीव भट्ट ने नरेंद्र मोदी के नाम एक खुला ख़त लिखा था। जिसमें वो कहते हैं, “ऐन मुमकिन है कि ज़िंदगी में कभी आपने भी आम इन्सानों की तरह प्यार के जादू को पहचाना होगा, या शायद बच्चे पैदा करने, एक परिवार शुरू करने के बारे में सोचा होगा! क्या आपने एक बार भी उनकी पत्नियों और उनके बच्चों के बारे में सोचा, जो एक वक़्त पर आपके चापलूस रहे थे, और अब आजीवन कारावास में हैं?”

संजीव भट्ट को मिली सज़ा के मामले में उनकी पत्नी ने ये आरोप लगाए हैं, कि ये सज़ा राजनीति से प्रभावित है।

आज हम आपको वो पूरा ख़त पढ़वा रहे हैं:

फोटो सौजन्य हिन्दुस्तान टाइम्स

प्रिय नरेंद्र मोदी,

आपके वफ़ादार सिपाहियों डॉ माया कोडनानी और बाबू बजरंगी और भ्रांतिपूर्ण हिन्दुत्व के पथभ्रष्ट पैदल सिपाहियों को मिली सज़ा के बारे में आपको पहले से आगाह किया ही गया होगा। इन सबको ज़िंदगी भर की क़ैद की सज़ा दी गई है। क्या ये महज़ एक इत्तेफ़ाक है कि आपने वक़्त के अनुकूल ख़ुद को इन अभागे लोगों से चालाकी से दूर कर लिया?

क्या आपने एक बार भी उन लोगों के परिवार के बारे में विचार किया जिनको ज़िंदगी भर जेल में रहने की सज़ा मिली है? ये कहा जाता है कि एक वक़्त पर आप भी शादीशुदा थे। ऐन मुमकिन है कि ज़िंदगी में कभी आपने भी आम इन्सानों की तरह प्यार के जादू को पहचाना होगा, या शायद बच्चे पैदा करने, एक परिवार शुरू करने के बारे में सोचा होगा! क्या आपने एक बार भी उनकी पत्नियों और उनके बच्चों के बारे में सोचा, जो एक वक़्त पर आपके चापलूस रहे थे, और अब आजीवन कारावास में हैं?

मोदी जी, क्या आपने अपने डिज़ाइनर कपड़ों को भुला कर, अपने असली व्यक्तित्व पर एक नज़र डाली है? क्या आपने कभी इस मुखौटे के पीछे छुपे असली चेहरे की परछाई को देखा है? क्या आपने कभी अपने उस व्यक्तित्व के बारे में आत्म-निरीक्षण किया है, जिसे आपके मीडिया-मैनेजरों द्वारा बनाई एक काल्पनिक तस्वीर के पीछे छुपा दिया गया है? क्या आपने कभी एक भी बार सोचा है कि सिर्फ़ सत्ता में बने रहने के लिए अपने साथी इन्सानों को क़ुर्बान कर के उसका फ़ायदा उठाना कितना सही है? क्या आपने एक भी बार , कभी भी इस बात पर विचार किया है कि क्या ये सही है कि कोई इंसान जो आपकी आस्था में विश्वास नहीं करता है, सिर्फ़ इस वजह से उसकी हत्या को बढ़ावा देना क्या सही है? क्या इस तरह ख़ुद के व्यक्तित्व के साथ धोखा करना सही है? या ये सिर्फ़ आपके राजनीतिक जुनून के लिए चुकाई जाने वाली छोटी से क़ीमत है?

मैं उम्मीद करता हूँ और भगवान से प्रार्थना करता हूँ इसी ज़िंदगी में इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए वक़्त, समझदारी और मौक़ा मिल सके।

भगवान आपका भला करे,

संजीव भट्ट


 

सौजन्य न्यूज़क्लिक।

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