आदिवासी महिला कवि होने का मतलब, जसिन्ता केरकेट्टा की जुबानी

आदिवासी महिला कवि होने का मतलब, जसिन्ता केरकेट्टा की जुबानी

  जसिन्ता केरकेट्टा ने गाँधी पीस फाउंडेशन में दिए अपने वक्तव्य मैं झारखंड के उरांव आदिवासी समूदाय से आती हूं और हिंदी में कविताएं लिखती हूं। मैं हिंदी में कविताएं लिखती हूं इसलिए आदिवासी साहित्य की परिभाषा गढ़ने वाले लोगों के अनुसार मेरी कविताओं का टोन आदिवासी न होकर सवर्ण है। दलित समूदाय के बीच…