• #Notinmyname: Protest Against the Rising Tide of Hatred Against Muslims in India and Especially Rajasthan. 

    December 11, 2017


     

    ​#Notinmyname

     

    India is bleeding. The time to remain silent is over. The brutal murder in Rajsamand, Rajasthan of Afrazul Islam a migrant worker from West Bengal has brought home searingly the vulnerability of minorities, especially Muslims to hate crimes being committed against them in the India of today. The murderer, Shambhu Lal Regar can be heard on the video that he got made of the killing justifying his crime in the name of so called 'Love Jihad', a bogey conjured up by proponents of hatred to demonize and target Muslim men in consensual love relationships with Hindu women. 

    Regar's statement sounds eerily like that of Nathuram Godse justifying the murder of Mahatma Gandhi. Both justify murder in the name of hatred. Both are proud of committing hate crimes. 

    We call upon all citizens to join us on Wednesday, 13 December, 5 PM at Parliament Street, New Delhi to protest against the rising tide of hatred against Muslims in India and especially Rajasthan. 

    Muslims are being stripped of their rights as citizens of India to life, dignity, equality and the freedom of religion and belief. As citizens of India it is time we stood up for the rights of our fellow citizens and said in one voice – I am Muslim, I am India. 

    It is frightening and tragic that lynching and killing of Muslims is today being discussed on media as part of a reasoned debate. Hatred cannot be justified through reason. There is no justification to murder. The time to remain silent is over. At stake is no longer just the unity and integrity of this nation. We are now facing something much bigger; it is humanity that is on the verge of being destroyed in our country. This has to be resisted on the streets, together, holding hands and standing united. 

    We demand immediate dismissal of the Vasundhra Raje government in Rajasthan. It had sworn in to defend the Indian Constitution and protect the life and liberty of all citizens. It has not only miserably failed on that count and several others but worse has promoted hatred against minorities. 

    Media reports suggest that court cases of the hate crimes against Muslims are either being diluted or going nowhere. That the murderers have often, as in the case of Shambhu Lal Regar, filmed their crimes on video and circulated them on social media reflects the culture of impunity that allows such hate crimes to go unpunished. The ambiguous public statements of politicians holding government positions in Rajasthan and at the Centre encourage these killings. They are as responsible for the hate crimes as those who do the actual killings. These are crimes of commission and omission against the Constitution of India with its promise of equality of all citizens and right to life and freedom of religion and belief. 

    On 13 December, 2017 let’s gather as citizens of India and say in one voice that the hatred, the violence directed against Muslims is Not in My Name. As citizens its time we stood up for the rights of our fellow citizens and said – I am Muslim, I am India.

    This is a citizens protest. All are welcome but without organisational banners and logos. 

    भारत लहुलूहान है. खामोश रहने का वक़्त खत्म हो चुका. पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मजदूर अफाराजुल इस्लाम की राजस्थान के राजसमन्द शहर में निर्मम हत्या के अलावा नफरती हमलों के ऐसे और भी हालिया मामले इस सच का एलान हैं कि आज के दौर में भारत में अल्पसंख्यक खासकर मुसलमान कितने असुरक्षित हैं. हत्यारा शम्भूलाल रेगर वीडियो पर हत्या को उचित ठहराते हुए यह कहता सुनाई देता है कि उसने यह कत्ल ‘लव जिहाद’ के नाम पर किया है. ‘लव जिहाद’ नाम के जहरीले हथियार के मार्फत नंफरत के सौदागर, ऐसे मुस्लिम पुरुषों को निशाने पर लेने का काम करते हैं, जिनके किसी हिन्दू महिला से सहमतिपूर्ण प्रेम सम्बन्ध हैं.

    रेगर का एलान ठीक नाथूराम गोडसे के बयान जैसा मालूम होता है जिसमे गोडसे, महात्मा गाँधी की हत्या को उचित ठहराता है. दोनों ही नफरत के नाम पर की गई हत्या को उचित ठहराते हैं. दोनों को ही अपने घृणित अपराध पर गर्व है.

    हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि बुधवार, 13 दिसंबर को शाम 5 बजे संसद मार्ग पर, भारत में विशेषकर राजस्थान में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ते हमलों के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में शामिल हों. आज, मुसलमानों को उन सभी अधिकारों से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है जो उन्हें एक नागरिक के तौर पर हासिल हैं, चाहे वह जीने का अधिकार हो या उनकी गरिमा और समानता का अथवा उनके धर्म या उनकी आस्था का. भारत के नागरिक के तौर हमें अपने साथी नागरिकों के समर्थन में खड़े होना होगा और एक आवाज़ में एलान करना होगा : मैं हूँ मुसलमान ! मैं हूँ हिंदुस्तान !

    यह और भी भयानक और दुर्घटनापूर्ण है कि मुसलमानों की नृशंस हत्याओं पर मीडिया में चर्चा तर्कपूर्ण बहसों से हो रही है. हिंसा को किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता. हत्या किसी की भी हो, उसे ठीक कैसे करार दिया जा सकता है ? चुप रहने का समय नहीं रहा क्योंकि अब सिर्फ देश की एकता और अखंडता पर ही खतरा नहीं बल्कि इस मुल्क से इंसानियत नाम की चीज़ खत्म कर देने के कगार पर पहुँचा दी गई है. हम सबको मिलकर, एक-दूसरे का हाथ थामकर, देश की गली-गली में , चप्पे-चप्पे में इसका विरोध करना होगा.

    हमारी मांग है की राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार को तुरंत बर्खास्त किया जाए. यह सरकार संविधान के पालन और आम नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करने की शपथ लेकर सत्ता में है. यह सरकार इस भयानक घटना के साथ-साथ अन्य बहुत से मसलों पर भी अपनी शपथ का पालन करने में न सिर्फ नाकाम रही है, बल्कि उससे भी बदतर यह कि इसने राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति हिंसा को बढ़ावा देने का काम किया है.

    मीडिया की रिपोर्टों से पता चलता है मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में दायर मुकदमों को या तो बहुत हल्का बना दिया जाता है या फिर लटका दिया जाता है. शम्भूलाल रेगर जैसे हत्यारे हत्या को फिल्मा कर, उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने का दुस्साहस इसीलिये तो कर पाते हैं कि उन्हें कहीं न कहीं यकीन है कि एक ऐसा माहौल बन गया है कि ऐसा अपराध करके भी वे सजामुक्त रह सकते हैं. ऐसी किसी भी घटना पर जिम्मेदार पदों पर बैठे, राजस्थान और केंद्र के नेताओं के बयान इस कदर दोगले होते हैं कि वे आग में घी डालने का ही काम करते हैं. ऐसे लोग भी इन घृणित अपराधों के उतने ही दोषी हैं जितने कि वास्तविक हत्यारे. ये अपराध उस संविधान की आत्मा को तार-तार करते हैं जो अपने नागरिकों को समानता, जीवन के अधिकार और धर्म अथवा आस्था की स्वन्त्रता का वचन देता है.

    आइये, 13 दिसम्बर, 2017 को हम सब नागरिक इकठ्ठा हों और एक आवाज में एलान करें कि मुसलमानों के प्रति हिंसा मेरे नाम पर नहीं है. नागरिक के तौर पर हम अपने साथी नागरिकों के समर्थन में खड़े हों और एकजुट हो कर कहें – मैं हूँ मुसलमान ! मैं हूँ हिंदुस्तान !

    यह आम नागरिकों का विरोध-प्रदर्शन है. आप सभी का स्वागत है. कृपया किसी संगठन के बैनर अथवा चिन्ह अपने साथ न लायें.


    Please share the protest announcement

    Not In My Name Event Page – https://www.facebook.com/events/366179823844032/

    Donate to the Indian Writers' Forum, a public trust that belongs to all of us.