बापू तुम कौन हो?

चतुराई और व्यंग के साथ, बेबाक़ ढंग से राजिंदर अरोड़ा इस कविता में गाँधी की सराहना भी करते हैं, और आलोचना भी. सुनिए सुधन्वा देशपांडे के स्वर में. 

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