लोकतंत्र की मॉब लिंचिंग: सब याद रखा जाएगा

28 सितम्बर 2015 को एक भीड़ ने मोहम्मद अख़लाक़ की जान ले ली क्योंकि उन्हें शक था कि अख़लाक़ के घर में गौ मास है। धर्म, जाति और गाय के नाम पर हत्याओं की वो महज़ एक शुरुआत थी।  पर दादरी के मोहम्मद अख़लाक़ से हाथरस तक, सब याद रखा जाएगा।

ये सभी उल्लेख वाम प्रकाशन की किताब लोकतंत्र की मॉब लिंचिंग में से लिए गए हैं.