ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता “ठाकुर का कुआँ” इरफ़ान ख़ान की आवाज़ में


ठाकुर का कुआँ
—ओमप्रकाश वाल्‍मीकि
 

चूल्‍हा मिट्टी का
मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का ।

भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का ।

बैल ठाकुर का
हल ठाकुर का
हल की मूठ पर हथेली अपनी
फ़सल ठाकुर की ।

कुआँ ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्‍ले ठाकुर के
फिर अपना क्‍या ?
गाँव ?
शहर ?
देश ?

(नवम्बर, 1981)

Video courtesy Art Bodies.