पुलिसिया बर्बरता और प्रधानमंत्री की साम्प्रदायिक टिप्पणी के ख़िलाफ़ बयान

कल, तारीख़ 15 दिसम्बर 2019 को, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पुलिस ने हिंसक प्रदर्शन को रोकने के नाम पर जिस तरह की सुनियोजित बर्बरता दिखाई है, हम उसकी भर्त्सना करते हैं| इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि हिंसक प्रदर्शन के अपने तर्क को अधिक मज़बूत बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने खुद ही बसों को आग के हवाले भी किया| अगर यह खबर सही है तो यह सिर्फ निंदनीय नहीं, आगे के लिए बहुत चिंताजनक भी है, क्योंकि इससे साफ़ हो जाता है कि पुलिस को ऊपर से यह आदेश है कि नागरिकता संशोधन क़ानून का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे विद्यार्थियों को, और ऐसे विद्यार्थियों को भी जो प्रदर्शन में शामिल नहीं हैं, हिंसा का शिकार बनाया जाए ताकि जनता में खौफ़ क़ायम हो| दिल्ली पुलिस द्वारा अपने हाथों बसों को आग लगाने की ख़बरें सही न भी हों तो कल के पूरे घटनाक्रम से यह ज़ाहिर हो जाता है कि अलीगढ़ और जामिया. दोनों जगहों पर पुलिस ने मोदी और योगी सरकार के निर्देश पर विद्यार्थियों के साथ दुश्मनों जैसा बरताव किया है| यह बहुत भयानक है कि जिस समय दोनों विश्वविद्यालयों में इस तरह की बर्बरता चल रही थी, दुमका (झारखण्ड) में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए श्री नरेंद्र मोदी कह रहे थे कि “आग लगाने वाले कौन हैं, यह उनके कपड़ों से ही पता चल जाता है|” प्रधानमंत्री मोदी से इस बात की व्याख्या करने के लिए कहा जाना चाहिए| यह कितना शर्मनाक है कि देश का प्रधानमंत्री सीधे-सीधे साम्प्रदायिक भाषा बोल रहा है| इस भाषा में ही नागरिकता संशोधन क़ानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर की योजना बनाने वाली मानसिकता छिपी है|

हम विद्यार्थियों और आम जनता पर पुलिसिया बर्बरता की कठोर शब्दों में निंदा करते हैं| हम प्रधानमंत्री मोदी के दुमका भाषण के साम्प्रदायिक स्वर और संकेतों की भर्त्सना करते हैं| हम मानते हैं कि इस देश में नागरिकता संशोधन कानून को लागू कर और राष्ट्रीय स्तर पर नागरिकता रजिस्टर बनाने का संकल्प व्यक्त कर केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने साम्प्रदायिक उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में एक फ़ैसलाकुन क़दम उठाया है और जनजीवन को अशांत कर दिया है| केंद्र सरकार को अविलम्ब नए नागरिकता क़ानून को वापस लेने की प्रक्रिया आरम्भ करनी चाहिए और नागरिकता रजिस्टर बनाने के अपने संकल्प को कूड़ेदान में डालना चाहिए जो कि उसकी सही जगह है| प्रधानमंत्री मोदी को अगर अपने पद की गरिमा की थोड़ी भी चिंता है तो उन्हें अविलम्ब दुमका के अपने भाषण के साम्प्रदायिक इशारों को लेकर माफी मांगनी चाहिए|  

मुरली मनोहर प्रसाद सिंह (महासचिव)
राजेश जोशी (संयुक्त महासचिव)
संजीव कुमार (संयुक्त महासचिव)