निदा नवाज़ : कश्मीर और शेष भारत के बीच कविता का पुल

कश्मीर आज कैसा है, कल कैसा था। ये सब डॉ. निदा नवाज़ की कविताओं में साफ़ दिखता है। वे इसके चश्मदीद गवाह हैं। उनकी ज़्यादातर कविताएं कश्मीर की पीड़ा और विस्थापन की कविताएं हैं। उनकी कविता अपने आप में अक्स और आईना दोनों हैं। सन् 1963 में कश्मीर के पुलवामा में जन्में डॉ. निदा नवाज़ की अब तक कई किताबें आ चुकी हैं। हिंदी कविता में 1997 में 'अक्षर अक्षर रक्त भरा’, 2015में 'बर्फ़ और आग' और अभी 2019 में 'अँधेरे की पाज़ेब' संग्रह आए। इसके अलावा भी सिसकियां लेता स्वर्ग (डायरी), हिंदी डायरी (उर्दू कविता संग्रह) और अन्य रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। आपने बहुत सी कश्मीरी कविताओं और कहानियों का भी हिंदी में अनुवाद किया है। आप आकाशवाणी श्रीनगर केंद्र के संपादकीय कार्यक्रम 'आज की बात' का पिछले 30 वर्षों से एक फ्रीलांसर के रूप में लेखन कर रहे हैं। न्यूज़क्लिक ने उन्हें विशेष तौर पर आमंत्रित किया और बातचीत करते हुए आपके लिए कविताएं रिकार्ड कीं।