लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत ज़िले के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक को प्रशासन ने बजरंग दाल और विश्व हिन्दू परिषद की शिकायत के बाद निलंबित कर दिया है। विहिप और बजरंग दाल ने फ़ुरकान अली के ख़िलाफ़ शिकायत इस लिए की क्योंकि उनके स्कूल में छात्र प्रार्थना में इक़बाल की लिखी गई नज़्म "लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी" गाते हैं। इन दोनों हिंदूवादी संगठनों को इस नज़्म से दिक़्क़त शायद इस वजह से है क्योंकि ये नज़्म या तराना "ख़ुदा" से बात करता है, जबकि आज भी हिन्दुस्तान और ख़ास तौर पर उत्तर प्रदेश के ही स्कूलों में ऐसी प्रार्थनाएँ होती हैं, जो कि धार्मिक हैं, और उनमें हिन्दू सभ्यता के भगवानों का ज़िक्र शामिल होता है।

सरकार के इस हिन्दूवादी रवैये के बीच हम आपके साथ साझा कर रहे हैं इक़बाल की लिखी ये नज़्म 

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
ज़िन्दगी शम्मा की सूरत हो ख़ुदाया मेरी

हो मेरे दम से यूँ ही मेरे वतन की ज़ीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनत

ज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शम्मा से हो मुझको मोहब्ब्त या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्दमंदों से ज़ईफ़ों से मोहब्बत करना

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझको

यह नज़्म इक़बाल ने १९०२ में लिखी थी। इस नज़्म के अलावा इक़बाल ने "सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा" भी लिखा है। अल्लामा मुहम्मद इक़बाल उर्फ़ इक़बाल अविभाजित भारत के प्रमुख कवियों में से थे।