रहमान अब्बास को मिली यूरोप की प्रसिद्ध “क्रासिंग बॉर्डर्स” ग्रांट

साहित्य अकादेमी अवार्ड हासिल करने वाले उर्दू लेख़क उन १० अंतर्राष्ट्रीय लेखकों में से एक हैं जिन्हें ‘क्रासिंग बॉर्डर्स’ इंटरनेशनल ग्रांट २०१९ के लिए चुना गया है I रोबर्ट बोस्च फाउंडेशन और लिटरेचर कोल्लोकुइम बर्लिन (जर्मनी) के सहयोग से ‘क्रासिंग ब्रोदेर्स’ ग्रांट हार साल साहित्य, फिल्म निर्देशक और फोटोग्राफी के लिए अंतरराष्ट्रिया स्तर पर दिजातीहै I रहमान अब्बास भारत के ऐसे पहले उर्दू लेख़क हैं जिन्हें नावेल लिखने के लिए ये ग्रांट मिली है I

रहमान अब्बास मुंबई निवासी हैं और अब तक उनकी ७ किताबें पर्काशित हुई हैं, जिनमें चार उपन्यास हैं I उन्हें दो बार महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादेमी अवार्ड्स मिले है और २०१८ में उनके मशहूर उपन्यास ‘रोह्ज़ीन’ पर उन्हें रास्ट्रीय साहित्य अकादेमी अवार्ड मिलाहै I

क्रासिंग बॉर्डर्स की जूरी ने रहमान अब्बास को यूरोप (खास कर जर्मनी) की सैर और बुद्धिजीवियों से मिलने का औसर दिया है, इस दौरान ओव नाज़िस्म (Nazism) और हिंदुत्वा का अध्यन करेंगे, हिटलर ने यहूदियों के नरसंहार के लिए जो‘कंसंट्रेशन कैम्पस’ बनाये थे उनका दौरा करेंगे Iउपन्यास इस बात की खोज होगी के नाज़िस्म और हिन्दुवाविचारधारा में कितना अंतर है, कितनी समानता है? क्या जर्मनी का भूतकाल भारत का भविष्य  है? पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के इस्लामिक समर्थक वहां की माइनॉरिटीज़ के साथ कैसा बर्ताव करते हैं और क्या उनका भविष्य भी अँधेरे में है I रहमान अब्बास के मुताबिक ये नावेल भारत और पाकिस्तान में बसे लाखों हिन्दू और मुस्लिम अल्पसंख्यकों की ज़िन्दगी के एक भयानक डर की कहानी होगी.