“दलित साहित्य एक क्रांतिकारी साहित्य है”

दलित लेखक शरणकुमार लिंबाले भारतीय दलित साहित्य, दक्षिणपंथी सरकार के दमन के प्रति दलितों के आक्रोश, वामपंथ और दलित आंदोलन इत्यादि के बारे में इंडियन कल्चरल फोरम और न्यूज़क्लिक से चर्चा करते हुए।


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शरणकुमार लिंबाले एक जाने मने मराठी दलित लेखक हैं। 1 जून, 1956 को जन्मे शरणकुमार लिंबाले ने एम.ए., पीएच.डी. की शिक्षा प्राप्त की है। अक्करमाशी’(आत्मकथा), छुआछूत’, देवता आदमी, दलित ब्राह्मण’ (कहानी संग्रह), दलित साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र (समीक्षा), नरवानर, हिंदू, बहुजन’ (उपन्यास) आपकी कुछ प्रकाशित कृतियों में से हैं ।