Poem by Saumya Baijal

Poem by Saumya Baijal

Henri Matisse, 'The Reader, Marguerite Matisse', 1906 / Hugbear   अख़बार   रोज़ सुबह अख़बार  आपसे मिलने से पहले खुद से मिलता है । रोज़ सुबह ख़ुद में कई बदलाव पाता  है ।   ख़बरें नहीं, शायद अब आंकड़े बताता है, आज ८०, कल ९० । इंसान के साथ न रह पाने की कमज़ोरियाँ, अलग…