“छोटे मुँह बड़ी बात”

“छोटे मुँह बड़ी बात”

कविता का एक सिरा समाज से जुड़ा होता है तो उसके दुसरे सिरे को व्यक्ति थामे रहता है। इसलिए अगर कविता को हम व्यष्टि और समष्टि के बीच एक रचनात्मक पुल कहें तो गलत न होगा। कविता एक मन (कवि के मन) से बहती हुई दूसरे मन (सहृदय के मन) तक जाती है। लेकिन इस…