यहीं कहीं रहेंगे केदारनाथ सिंह

यहीं कहीं रहेंगे केदारनाथ सिंह

हिन्दी कविता की एक महत्वपूर्ण पीढी तेज़ी से विदा हो रही है. यह दृश्य  दुखद और  डरावना  है जहां ऐसे बहुत कम कवि बचे हैं जिनसे कविता का विवेक और प्रकाश  पाया जा सके. पिछले वर्ष कुंवर नारायण, चंद्रकांत देवताले, दूधनाथ सिंह, और अब केदारनाथ सिंह. केदार जी रक्तचाप, मधुमेह या हृदयाघात जैसी व्याधियों  से…