Prof G N Saibaba Pens a Poem After Meeting His Mother in Jail

Prof G N Saibaba Pens a Poem After Meeting His Mother in Jail

    माँ, मेरे लिए मत रोना जब तुम मुझे देखने आयी तुम्हारा चेहरा मैं नहीं देख सका था फाइबर कांच की खिड़की से मेरी अशक्त देह की झलक यदि मिली होगी तुम्हें यक़ीन हो गया होगा कि मैं जीवित हूँ अब भी।   माँ, घर में मेरी गैर मौजूदगी पर मत रोना   जब…