• केरल ! केरल !

    Prayag Shukla

    September 12, 2018

    केरल ! केरल !

    जल ही जल है !!

    जल की इस बहती आंधी की 

    कैसी तो लीला अविरल है।

    टूटे भहरा पुल घर सड़कें ।

    दिल सब जल के भय से  धडकें ।।

    बादल गरजें बिजली कडके।

    स्वर भड़  भड़ के।

    स्वर भड़ भड़ के ।।


    पुष्ट भुजायें फैली  बाहें ।

    जल से जो हैं टूटी राहें ,

    फिर वे संवरें ,

    ऊंची लहरें, निष्फल हों सब,

    उठती भंवरें ।।

    केरल ! केरल !

    देश साथ है ।

    झुका न उसका अरे माथ है ।।

    जल में ही वह बड़ा हुआ है, 

    जल में फिर उठ खड़ा हुआ है ।।
     

    जैसे पार कराती नावें ,

    वैसे पार लगाती नावें।।

    दुःख विपदा अब पास न आवें,

    सुख सुविधा हम सब पहुँचावें।।

    'केरल ! केरल! '

    फिर हम गावें।।

    Prayag Shukla is poet,fiction writer ,art critic and translator from Bengali and English in to Hindi.

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